Tuesday, September 2, 2025

गांव में बाढ़ – पानी की परछाई"

साल 2023 का जुलाई महीना गांव के लिए कभी न भूलने वाला समय बन गया। हर साल बारिश होती थी, लेकिन इस बार जो हुआ, वो कुछ अलग ही था – बाढ़ ने पूरे गांव को अपने आगोश में ले लिया। जहां खेतों में हरियाली लहराती थी, वहां अब पानी की नदियाँ बह रही थीं। यही समय था जब गांव की एकजुटता, बच्चों की मासूमियत और प्रकृति की ताकत साफ झलक रही थी।


बारिश कई दिनों से लगातार हो रही थी। पहले तो सभी को अच्छा लगा कि फसलें लहलहाएंगी। लेकिन धीरे-धीरे बारिश ने अपना रूप बदल लिया। एक दिन सुबह जब गांववाले उठे, तो देखा – चारों तरफ पानी ही पानी। गलियाँ, आंगन, खेत – सब डूब चुके थे।

गांव के बीचोंबीच से एक पक्की सड़क खेतों की ओर जाती थी। जब पानी उतरने का कोई रास्ता नहीं मिला, तो कुछ लोगों ने खेत की ओर जाने वाली उसी सड़क को काटने का फ़ैसला किया ताकि पानी निकल सके। लेकिन यही बात विवाद का कारण बन गई। कुछ लोगों को डर था कि सड़क कटेगी तो खेतों को नुकसान होगा।

गुस्से और बहस का माहौल बनने लगा। बात बढ़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा। पुलिस ने समझदारी से दोनों पक्षों की बातें सुनीं और गांव के बुजुर्गों की सलाह पर सड़क का एक हिस्सा काटा गया। पानी बहने लगा और गांव ने राहत की सांस ली।

इस बाढ़ के बीच बच्चों की दुनिया अलग ही थी। वे कीचड़ में फिसलते, नाचते, और सबसे ज्यादा मछली पकड़ने में मज़ा लेते। उनके लिए ये बाढ़ मुसीबत नहीं, बल्कि खेल का मैदान बन गई थी। महिलाएं दूर-दूर से आकर पानी देखने खड़ी हो जातीं। हर नुक्कड़ पर पानी की चर्चा थी।


ये बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, यह गांव की एकजुटता, सहमति और समझदारी का भी इम्तिहान थी। जहां एक ओर परेशानी थी, वहीं दूसरी ओर लोगों में साथ खड़े होने की भावना भी थी। और इन सबके बीच, बच्चों की मासूम मुस्कान जैसे संदेश दे रही थी – "मुसीबत में भी खुश रहना एक कला है।"


"जहां पानी ने डराया, वहीं हिम्मत ने रास्ता बनाया – गांव की कहानी, बाढ़ की जुबानी।"

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